Saturday, 19 September 2015
बाल कविता : दादी का मौसम
दादी का मौसम
गरमी को पानी से धोएं
बारिश को हम खूब सुखाएं
जाडे़ को फिर सेंक धूप
में दादी को हम रोज खिलाएं
कैसा भी मौसम आ जाए
उनको सदा शिकायत रहती
इससे तो अच्छा यह होगा
उनका मौसम नया बनाएं
कम दिखता है, दांत नहीं हैं
पैरों से भी नहीं चल पातीं
बैठी-बैठी कहती रहतीं
ना जाने कब राम उठाए
शुभ-शुभ बोलो प्यारी दादी
दर्द भूलकर हँस दो थोड़ा
आंख मूंदकर लेटो अब तुम
बच्चे मीठी लोरी गाएं।
बाल कविता : हंसने का स्कूल
हँसने का स्कूल
पहले सीखो खिल-खिल खिलना
बढ़कर गले सभी से मिलना
सारे यहीं खिलेंगे फूल
यह है हँसने का स्कूल
जल्दी आकर नाम लिखाओ
पहले हँसकर जरा दिखाओ
बच्चे जाते रोना भूल
यह है हँसने का स्कूल
झगड़ा-झंझट और उदासी
इसको तो हम देंगे फांसी
हँसी-खुशी से झूलम झूल
यह है हँसने का स्कूल।
बाल कविता : आइसक्रीम
आइसक्रीम
आइसक्रीम-आइसक्रीम
ठंडम-ठंडम आइसक्रीम
धत तेरी गरमी तो देखो
पिघल गई लो आइसक्रीम
अब क्या होगा कैसे होगा
पिघल गई लो आइसक्रीम
बर्फ मंगाओ इसे जमाओ
जम जाए तो मिलकर खाओ
मेरी मानो तो कहता हूँ
झटपट खाओ, खाते जाओ
जैसी भी है, अच्छी ही है
आइसक्रीम-आइसक्रीम
ठंडम-ठंडम आइसक्रीम
पिघलम-पिघलम आइसक्रीम।
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