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Thursday, 22 February 2018

पागल हुई रसोई --देवेन्द्र कुमार--बाल गीत



पागल हुई रसोई---बाल गीत—--देवेन्द्र कुमार
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मां गुस्सा थी सारे घर से
पागल हुई रसोई

पापा ने जब गैस जलाई
खुद ही पानी डाल बुझाई
डिब्बा-डिब्बा ढूंढ़ थके हम
चीज मिली न कोई

सब कुछ उलट पलट कर डाला
गिरा दूध में गरम मसाला
मुन्नी ने जो घूंट भरा तो
चीख-चीख कर रोई

मैंने गरम तवा खिसकाया
पापा ने भी हाथ जलाया
चीख-पुकार मची थी घर में
काम हुआ न कोई

पापा ने आवाज़ लगाई
मम्मीजी तब उठ कर आईं  
दोनों की आँखें कुछ बोलीं
हंसने लगी रसोई। ======

Friday, 9 February 2018

गोलगप्पा --देवेन्द्र कुमार --बाल गीत



गोलगप्पा
गोलगप्पा गोलगप्पा
हाउ हप्पा हाउ हप्पा

जैसे ही हाथों में पकड़ा
उछल कूदकर यह जा वह जा
दिल्ली से उछला तो पहुंचा
झट सीधा जापान

मिर्च-मसाला खूब उड़ाया
जो भी आया उसे छकाया
लो तुम मेरा नाम बताओ
बोला सीना तान

बेचारे जापानी घबराए
इस आफत से कौन बचाए
हाथ जोड़कर सारे बोले
तुम भारत की शान==

Thursday, 1 February 2018

गर्म सड़क पर --देवेन्द्र कुमार --बाल गीत



गर्म सड़क पर ---देवेन्द्र कुमार –बाल गीत

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गर्म सड़क पर नंगे पांव
क्यों चलते कुछ लोग
               
बड़ी-बड़ी दुकान सजी हैं
बाजारों में धूम मची है
कुछ जेबों में सारा पैसा
कैसा है संजोग

रोटी की तो कमी नहीं है
कुछ लोगों को भूख नहीं है
फिर भी ऐसे कितने सारे
इसका सहें वियोग

मेहनत से तो जादू होता
फिर क्यों मेहनतकश है रोता
कहीं  बहुत गड़बड़ है भाई
कैसे सुधरे रोग

गर्म सड़क पर नंगे पांव
क्यों चलते कुछ लोग

Sunday, 28 January 2018

मुफ्त मिले --देवेन्द्र कुमार -- बाल गीत



मुफ्त मिले---देवेन्द्र कुमार –बाल गीत 
 
  .
महंगाई के इस मौसम में
मुफ्त मिले बस मां का प्यार

जब-जब देखे प्यार जताए
अच्छी अच्छी बात बताए
खुद न खाकर हमें खिलातीं
पल पल करती रहे दुलार

कभी कभी गुस्सा भी आता
होंठों से मुस्कान भगाता
माथे पर बल पड़ जाते हैं
अब कैसे हो बेड़ा पार

पर दिल मां का बहुत नरम है
गुस्सा तो एक झूठ भरम है
हमें उदास देखकर भर ले
अपनी गोदी में हर बार
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